कोयम्बटूर तमिलनाडु:-कॉटन की नगरी कोयम्बटूर शहर के लिंगप्पा रोड़ स्थित सीरवी समाज के आईमाताजी मंदिर परिसर में माँ भगवती के नवरात्रि महोत्सव के दौरान विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
नवरात्रि महोत्सव सीरवी समाज के तत्वावधान में समस्त सीरवी समाज कोयम्बटूर की और से नवरात्रि महोत्सव का शुभारम्भ 21 सितम्बर 2017 गुरूवार को श्री आईमाताजी मंदिर बडेर प्रांगण में हुआ। नो दिनों तक चले महोत्सव के दौरान प्रतिदिन शाम को माँ श्री आईजी की पूजा-अर्चना, मंगल आरती में स्वजातीय बन्धुओं व श्री महिला मंडल सेवा के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल होते थे। प्रतिदिन सुबह करीब 11.00 बजे से रात्रि 12.30 बजे तक सतपाल जी महाराज की शिष्या श्रीमती अनुभूति बाईजी श्री मानव सेवा उत्थान द्वारा श्रीमद्धभागवत कथा तथा भक्ति गीतों का कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसका सब श्रद्धालुओं ने भरपूर आनन्द लिया। कथा के माध्यम से श्रीमती बाईजी महाराज ने बताया की नवरात्रि की पहले दिन श्रद्धालु घर या मंदिर में कलश की स्थापना करते हैं. इसे घट-स्थापना भी कहते है. जो साधक नवरात्रि व्रत का संकल्प लेते हैं, वे एक उचित और पवित्र स्थान पर मिट्टी की वेदी बनाकर वहां "जौ सहित सात प्रकार के अनाज" बोते है. फिर इस वेदी पर एक कलश या घट की स्थापना करते हैं. नो दिनों तक चले नवरात्रि महोत्सव पर बडेर प्रांगण में माँ श्री दुर्गाजी की प्रतिमा के सम्मुख पूजा-अर्चना के बाद माताओं, बहिनों व नन्हें- मुन्ने बाल गोपालों द्वारा भव्य गरबा व महिलाओं द्वारा डांडिया नृत्य का आयोजन होता था, जिसमे हर श्रद्धालु सुसज्जित राजस्थानी वेशभूषा में आते और 'पंखीडा रे उड़वन जावे आईमाता धाम रे...' की धुन पर भावविभोर होकर नृत्य करते।
29 सितम्बर शुक्रवार की सुबह माँ श्री आईजी की द्वारा श्रीमद्ध भागवत कथा वाचन किया। महिलाओ ने गरबा नृत्य व् सुंदर गीत प्रश्तुत किये केसरिया पधारो म्हारे देश... का खास अंदाज में गरबा के रंग को और अधिक सुनहरा कर व रामजी की चाल देखो...,पार्टी तो बनती है..., राधा तेरी चुनरी..., अरे दीवाने... आदि गीतों की प्रस्तुतियाँ दी साथ ही बड़ी संख्या में युवक व युवतियों द्वारा गुजराती गाने पंखिडा रे उड़ी जाजे पावागढ़ रे, महाकाली ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे...मारी कालका माँ ने जै ने कह्जो गरबे रमे रे.. आदि पर धूमधाम से गरबा नृत्य किये और लोग गरबा के रंग में डूबते नजर आये। पूरा माहोल ही खुशियों से भरा था। माँ देवी दूर्गा के नो स्वरूपो में बाल बालिकाओं ने अपने विशेष कार्यक्रम के दौरान एक-एक रूप में प्रस्तुतियाँ दी।
नो दिनों तक चले नवरात्रि महोत्सव के दौरान जिन भाईयों, माताओं और बहिनों ने अखण्ड व्रत किया, उन सभी का सीरवी समाज की और माँ नवदुर्गा की असीम कृपा, करुणा आशीर्वाद हमेसा आप पर बनी रहे।आपके परिवार में सुख सम्रद्धि बनी रहे हमेसा। माँ नवदुर्गा के नवरात्र समापन के दौरान श्रीमती अनुभूति बाईजी का भव्य स्वागत महिला मंडल की अमुख महिला द्वारा किया, और उनसे आशीर्वाद लिया सभी श्रद्धालुओं ने बाईजी ने बताया की नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है।इस कार्यक्रम की रूपरेखा ध्यान कर रहे दुर्गाराम सीरवी ने कहा कि नवरात्रि महोत्सव के दौरान नवयुवक मण्डल, महिलाओं एवं समाज के सभी धर्मप्रेमी बंधुओं, माताओं-बहिनों ने बहुत ही अच्छी व्यवस्था बनाए रखी और कार्यक्रम को सफल बनाने में पूर्ण सहयोग दिया। कार्यकारिणी सदस्यों ने अपना सक्रिय व सराहनीय सहयोग प्रदान किया। आप सबको बहुत बहुत धन्यवाद तथा भविष्य में भी आपसे इसी तरह सहयोग की अपेक्षा करते हैं। इस अवसर पर सीरवी समाज के अध्यक्ष श्री जोरारामजी मोग्रेचा ने बताया की नो दिनों तक समाज के बहुत स्वजाती बन्धुगनो के घरों पर सीरवी समाज की भजन मंडळी कलाकारों द्वारा अन्य जगहों पर नवरात्रि के मौके पर भजन कीर्तन किया गया सब जगहों पर 29 तारीख अंतिम दिन मेंको रात्रि भजन कीर्तन माँ के प्रांगण में भजन कलाकारों श्रीमान सेसाराम जी पंवार और मोतीलाल जी हामण्ड एन्ड पार्टी द्वारा किया गया और माँ की आरती के साथ माँ नवदुर्गा का सम्मापन किया गया इस मौके पर सेकड़ो समाज के बन्दुओ ने इस भजन कीर्तन में भाग लिया और माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया।सीरवी समाज सम्पूर्ण भारत वेबसाइट के प्रतिनिधि दुर्गाराम सीरवी पंवार कोयम्बटूर तामिलनाडु।👏💐👏💐
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Sunday, 1 October 2017
कार्यक्रम
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