Sunday, 1 October 2017

अब रावण को जिन्दा करना होगा

@@अब रावण को जिन्दा करना होगा @@

आज मेरा रावण से जमकर विवाद हुआ
भड़क गया वो कुछ ऐसा मेरा संवाद हुआ

वो बोला शर्म नहीं आती कलयुगी इंसानों को
जो खून के रिश्तों से बनते ऐसे अंजानो को

मैं भी उसके सामने हार कहा मानने वाली थी
राम के आदर्श पर मैं भी तो चलने वाली थी

मैय्या सीता पर नजर बुरी जो तुम्हारी हुई थी
उस सती के सतीत्व से दुनिया विनाशकारी हुई थी

अच्छा माना मैंने की इसमें अपराध जरुर मेरा था
अपनी शक्ति और विद्वत्ता का वो गुरुर मेरा था

ये बताओं मुझे तुम क्या आज मुझ जैसा रावण है
जिसने स्त्री की मर्यादा बनाये रखी ऐसा रावण है

सीता का हरन किया पर उसकी पवित्रता बनाये रखी
ना लगाया उसे हाथ उसकी अस्मिता बनाये रखी

कलयुग का इंसान कितना गिरा गया तुम देखों
इसने अपनी बहन बेटियों को नही छोड़ा तुम देखो

जब भी चुनाव आता है नारी की इज्जत याद आती है
और हाँ फिर यही बात पांच सालों के ही बाद आती है

तुम्हारे कानून की अब मैं क्या बात करूं फिर भी सुनों
कागजों पर बने है ये असंख्य इनके जज्ज्बत फिर भी सुनों

बुराई पर अच्छाई का जश्न धूम धाम से जो मनाते हो
पर अपने अंदर के असुर को तुम भी कहाँ जलाते हो

क्या तुम्हें अधिकार है मुझे जलाने का एक बार सोचों ?
क्या तुम मुझसे श्रेष्ठ हो बस इतना एक बार सोचों ?

मैं तो सन्न रह गई उसकी बातों को सुनते सुनते
फिर अपने अंदर के बुराई के टुकड़े चुनते चुनते

हाँ सच हमने  रावण को जलाने का अधिकार खो दिया
देखों इस दरिंदगी दुनिया को देख त्रिकाल रो दिया

अब बहुत हुआ इस पुतले को जलाना बंद करना होगा
खुद की बुराइयों को जला कर सत्य के मार्ग पर चलना होगा

हे शिव भक्त हे त्रिकाल दर्शी हे प्रकांड विद्वान् तुमसे तो  हारी है सत्तू
राम के आदर्शों जीवित रख अब रावण को जिन्दा करने की बारी है सत्तू

शताब्दी अंकित गेहलोत

No comments:

Post a Comment