चिकित्सा विभाग राजस्थान पर एक दृष्टि :
एक सटीक से विश्लेषण का प्रयास है यदि कोई ग़ुस्ताखी हो तो माफ़ करना 😊
विभाग में समीक्षा करने वालो की सूची -
माननीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री
माननीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री
माननीय जिला प्रभारी मंत्री
माननीय संसदीय सचिव
अन्य माननीय बोर्ड अध्यक्ष
माननीय बीसूका उपाध्यक्ष
श्रीमान एसीएस
श्रीमान जिला प्रभारी सचिव
आदरणीया प्रमुख शासन सचिव
श्रीमान मिशन निदेशक
श्रीमान अतिरिक्त मिशन निदेशक
श्रीमान निदेशक -४
श्रीमान अतिरिक्त निदेशक -५
श्रीमान संयुक्त निदेशक (निदेशालय)-१०
एनएचएम के विभिन्न कार्यक्रमों के नोडल अधिकारी -२० से ज़्यादा
सर्व श्रीमान
संभागिय आयुक्त
अतिरिक्त संभागिय आयुक्त
संयुक्त निदेशक जोन
सांसद
विधायक
ज़िला प्रमुख
प्रधान
कलेक्टर
एडीएम
मुख्य कार्यकारी अधिकारी
अति.मुख्य कार्यपालक अधिकारी
एसडीएम
तहसीलदार
विकास अधिकारी
आदि
पूरा सप्ताह, पूरे माह, प्रति दिन मीटिंग, VC,जनसुनवाईऔर समीक्षा
प्रत्येक समीक्षक अधिकारी का अपना एजेंडा 😂
काम न तो कुछ किया जाता है ,न करने दिया जाता है समय ही नही देते काम करने का पर्याप्त ।🙄 जो समय बचता है, शिकायतों की भेंट चढ़ जाता है।😒
योजनाऐं :-अनेक
प्रपत्र:-अनेक
अभियान :- लगातार
जानकारी बनाने वाला :- वही एक चिकित्सक !!😒
जिस से आम अवाम की अपेक्षा पूर्ण करने का वक़्त यह समीक्षक अधिकारी देते ही नहीं तो केसे दे सेवा ?😡
यहाँ तनाव:-अनेक
न परिवार न इच्छाएं
काम :-दिन रात कोई सीमा नहीं
केवल :- प्रपत्र ,जानकारी, समीक्षा!
और इन सब का प्रतिफल=विकास="0"[जीरो ]
कैसी सेवा - कैसा प्रबंधन ......
*काम करने वाले 1% भी नही, समीक्षा करने वाले 99%*
क्योंकि पूरा माह केवल जानकारी ओर मीटींग और समीक्षा मे बीत गया किसी को कुछ करने ही नही दिया गया।
यह है वर्तमान स्वास्थ्य प्रबंधन का विभत्स रूप ।
शिकायतें:-
सीएम हेल्प लाईन
कलेक्टर सतर्कता
कलेक्टर लोक शिकायत
जनसुनवाई
रात्रि चौपाल
लोकायुक्त
विभिन्न आयोग
कर्मचारियों की संख्या सीमित, वर्षो से पद रिक्त, संविदा नियुक्ति, वेतन कम, समय सीमित अभी ये करो अभी वो करो बस करते रहो,
मेनेजमेंट असंतुलित इत्यादि अनेक समस्याऐं ।
निष्कर्ष:- जिस विभाग मे केवल ओर केवल समीक्षा करने वालों की संख्या काम करने वालों.. की संख्या से ज्यादा हो जाये वहां स्वास्थ्य प्रबंधन और मरीज़ों को गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा सेवा मिल पाना एक "दिव्य-स्वप्न" है।
यह हाल हैं हमारे राज्य राजस्थान के स्वास्थ्य प्रबंधन का। 😒
कोई ना ..फिर भी एक निवेदन राज्य के नीतिनिर्धारक रहनुमावो से एक "दिन और रात"(24 घण्टे लगातार ) तो गुज़ारो राज्य के ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत सेवारत चिकित्सक के साथ 😡
🔥🔥👍🔥🔥
जागो !!!
आम अवाम से अपील !!!
अगर राज्य का स्वास्थ्य प्रबंधन सुधारना है और आम आदमी तक राज्य की स्वास्थ्य सेवा को ले कर जाना है तो सेवारत चिकित्सकों की इस पहल को अमली जामा पहनाना ही होगा !!!
पहली बार सेवारत चिकित्सकों ने अपने अनुभव के आधार पर राज्य का स्वास्थ्य प्रबंधन सुधारने के लिए पहल की है !!...... पर अफ़सोस यह कैसी व्यवस्था है.. शासन को यह आवाज क्यूँ नहीं सुन रही !!
शासन के सिपलहार ही रास्ता रोक रहे है स्वास्थ्य प्रबंधन का !!!.....खैर कब तक होगा ऐसा ??...नहीं चलेगा ज़्यादा दिन यह गेम !!😡....काम कोई करता है और इनाम कोई पाता है !!!!😂
(😝रामचंद्र कह गये सिया से ऐसा कलयुग आएगा हंस चुगेगा दाना तिनका, कौवा मोती खाएगा 😂😂😂😂😂)
जागो आम अवाम !!!
पीड़ित को सेवा देने के लिए तो तत्पर है हम ,पर इसके लिए समय एवम साथ तो दो .....🙏
राजस्थान राज्य को स्वास्थ्य मानकों की दृष्टि से बीमारु राज्य की श्रेणी से बाहर निकाल कर " पहला सुख निरोगी काया " के संदेश को अमली जामा पहनाने के लिए...अब आम अवाम का साथ चाहिए !!!🙏🙏
🙏
जय अरिसदा
🔥🔥🔥🔥🔥
डॉ अजय चौधरी
अध्यक्ष अरिसदा
राजस्थान
🙏🙏🙏🙏
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